अहमदाबाद/सूरत, 20 मार्च 2026 — एक चौंकाने वाले मामले में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने एक सुनियोजित नकली मुद्रा रैकेट का पर्दाफाश किया है। सूरत के श्री सत्यम योग फाउंडेशन (या सत्य योग फाउंडेशन) के प्रमुख प्रदीप जोतंगिया, जिन्हें प्रदीप गुरुजी के नाम से जाना जाता है, को गिरफ्तार किया गया है। इस गिरोह ने ₹500 के नकली नोट छापे और परिवहन कर रहे थे, जिनका फेस वैल्यू ₹2 करोड़ से अधिक था। कुल मिलाकर विभिन्न स्थानों से ₹2.38 करोड़ से ₹2.9 करोड़ तक के जाली नोट जब्त किए गए हैं।

19 मार्च 2026 को गिरफ्तारी हुई, जब पुलिस ने अहमदाबाद के अमराईवाड़ी इलाके में टॉरेंट पावर के पास एक सफेद SUV को रोका। गाड़ी पर “श्री सत्यम योग फाउंडेशन”, “AYUSH मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त” और “VVVIP” स्टिकर लगा था। बैग और कार्टन में छिपाकर ले जाए जा रहे बड़े पैमाने पर नकली नोट मिले। वाहन से लगभग 42,000 से 44,000 नकली ₹500 के नोट बरामद हुए, जिनका मूल्य ₹2.10 करोड़ से ज्यादा था।
मौके पर या बाद में कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें मुख्य आरोपी प्रदीप जोतंगिया, मुकेश ठुम्मर, अशोक मावानी, रमेश भालर (या बालर), दिव्येश राणा, भारत काकड़िया (ग्राफिक डिजाइनर जो नोट फिनिशिंग में शामिल था) और सूरत के कटारगाम इलाके की एक महिला शामिल हैं। सभी आरोपी सूरत के रहने वाले हैं।
पूछताछ के बाद पुलिस ने सूरत के वराछा इलाके में प्रिंटिंग सेटअप और कमरेज तालुका के स्टाड परदी (या धोरन परदी) गांव में फाउंडेशन के आश्रम पर छापेमारी की। अतिरिक्त जब्ती में ₹28 लाख से ₹80 लाख के नकली नोट, चीन से मंगाया गया उच्च गुणवत्ता वाला सिक्योरिटी थ्रेड पेपर, प्रिंटर, लैपटॉप, पेपर कटिंग मशीन, करेंसी काउंटिंग डिवाइस, रंगीन स्याही और अन्य उपकरण शामिल थे। यह ऑपरेशन करीब तीन-चार महीने से चल रहा था।
जांच में पता चला कि गिरोह ने फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर और ChatGPT जैसी AI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया। इससे नोटों का डिजाइन बेहतर किया, वॉटरमार्क जैसी विशेषताएं सुधारीं और अलग-अलग सीरियल नंबर जेनरेट किए ताकि नोट ज्यादा असली लगें। नोट पोस्ट-डिमॉनेटाइजेशन सीरीज पर आधारित थे, लेकिन कम गुणवत्ता या आयातित कागज पर छापे गए।
गिरोह ने नकली नोटों को बाजार में उतारना शुरू कर दिया था और पहला बड़ा सौदा कर रहा था। वे नकली नोटों को भारी छूट पर बेचते थे (उदाहरण: नकली ₹1500 के नोट ₹500 में, हालांकि विवरण अलग-अलग हैं)। पुलिस ने इसे शुरुआती चरण का लेकिन संगठित सिंडिकेट बताया, जो विभिन्न शहरों में नकली नोट फैलाने की कोशिश कर रहा था।
सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात इसकी कड़वी विडंबना है: प्रदीप गुरुजी योग और आध्यात्मिक फाउंडेशन चलाते थे, नैतिकता, ईमानदारी और स्वास्थ्य पर लेक्चर देते थे, लेकिन कथित तौर पर उन्होंने ही इस आर्थिक अपराध की साजिश रची। कुछ रिपोर्ट्स में आरोपियों ने दावा किया कि कमाई “सामाजिक कल्याण” और आश्रम गतिविधियों के लिए थी, जैसे इलाज के लिए आने वालों की मदद—लेकिन पुलिस ने इसे खारिज कर दिया।
यह मामला नकली मुद्रा में तकनीक (खासकर AI) के बढ़ते इस्तेमाल और आयातित सामग्री से अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को उजागर करता है। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच, डीसीपी अजीत राजियान के नेतृत्व में, व्यापक नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की तलाश में जांच जारी रखे हुए है।
आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं और नकली मुद्रा से जुड़े कानूनों के तहत कार्रवाई की गई है। जांच आगे बढ़ने पर और बरामदगी व गिरफ्तारियां संभव हैं।
